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वर्तमान राजनीति और नेताओं के बिगड़े बोल

“बोल की लब आजाद है तेरे” मशहूर फ़नकार और शायरी की रोमानी दुनिया के बादशाह फैज़ अहमद फैज़ की, इस कविता को नेपथ्य में रखकर वर्तमान राजनैतिक बयानबाजी के छिछले और निम्न स्तर को देखिए और मातम मनाइए।  कि किस तरह विश्व की सबसे बड़े लोकतंत्र में हुक्मरानों की अभद्र, असहनशील और असभ्य भाषा, संयमित और स्वस्थ लोकतंत्र की दिन-ब-दिन धज्जियाँ उड़ाती जा रही है। वर्तमान राजनीति में नेताओं के बिगड़े बोल भावी पीड़ी के लिए एक दुखद सबब है। यह बात बहुत साफगोई से हमें समझनी चाहिए कि हमारे सामाजिक एवं राजनैतिक परिवेश में भाषा, हमारी परवरिश का स्तर तय करती है। यह पैमाना होता है कि हमारी सोच का दायरा कितना सीमित और कितना वृह्द है। पर जब आपकी आपके लब आजादी के नाम पर कुछ भी अनियंत्रित कहने लगे तो उन पर लगाम की सख्त आवश्यकता है। जरूरत है कि इस तरह नेताओं के बिगड़े बोल वर्तमान राजनीति से तुरंत प्रभाव से रोक लिये जाए।

वर्तमान राजनीति और नेताओं के बिगड़े बोल

वर्तमान राजनीति और नेताओं के बिगड़े बोल  – जानिए कब, किसने, क्या कहा??

राजनेताओं के बोल बिगड़ने का मसला नया नहीं है। आए दिन चुनावी सभाओं से लेकर टीवी डिबेट्स में इस तरह की घटना आम है। बड़ा सवाल और मुद्दा यह नहीं है कि किसने क्या कहा। सवाल, उसके हो जाने का इतना नहीं है जितना उसके होने के बाद के रिएक्शन पर है। आप समझिए कि जब देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को “मौत का सौदागर” कहती है तो वे राजनैतिक विमर्श को कहाँ लेकर जाती है। जिस पर नरेन्द्र मोदी का उन्हें “जर्सी काॅउ” कहा यह भी कैसे न्यायोचित ठहराया जा सकता है। उच्च स्तर के आलाकमान नेताओं के बिगड़े बोल बेहद शर्मनाच है। तो माना जाए कि कुलजमा सत्ता, विपक्ष या तीसरा धड़ा कोई भी बयानबाजी के इस निकृष्ट कृत्य में पीछे नहीं है एवं वर्तमान राजनीति के लिहाज से नेताओ के यह बिगड़े बोल चिंताजनक है।

फिलहाल बानगी के तौर पर वर्तमान के कुछ नेताओं के बिगड़े बोल देखिए:-

 

वर्तमान राजनीति और नेताओं के बिगड़े बोल

50 करोड़ की गर्लफ्रेंड:- नरेन्द्र मोदी ने यह बयान कांग्रेस नेता शशि थरूर की मृत पत्नी सुनंदा पुष्कर के संदर्भ में!!

 

वर्तमान राजनीति और नेताओं के बिगड़े बोल
वंसुधरा मोटी हो गयी है, अब उन्हें आराम करना चाहिए:- यह बयान जदयू के बड़े नेता शरद यादव हाल ही में राजस्थान विधानसभा के समय दिया था।।

 

वर्तमान राजनीति और नेताओं के बिगड़े बोल
नरेन्द्र मोदी एक नीच किस्म का व्यक्ति है:- यह बयान कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने गुजरात चुनाव के वक्त दिया था हाँलाकि बाद में मोदी ने इस बयान को काफी भुनाया।।

 

वर्तमान राजनीति और नेताओं के बिगड़े बोल
विदेशी माँ से उत्पन्न संतान कभी भी राष्ट्रभक्त नहीं हो सकती:- बीजेपी के नेताओं को किसी को देशद्रोही या देशभक्त का सर्टिफिकेट चिपकाने की आदत है, कैलाश विजयवर्गीय ने यह ट्वीट अभी कुछ दिनों पहले किया था हाँलाकि बाद में हंगामा होता देख उन्होंने यह ट्वीट डिलीट कर दिया था।।

 

वर्तमान राजनीति और नेताओं के बिगड़े बोल
“वो कांग्रेस की कौनसी विधवा थी जिसके खाते में पैसा जाता था”

 

यह अमानवीय बयान जयपुर की एक रैली में प्रधानसेवक नरेन्द्र मोदी ने सोनिया गांधी के ऊपर कटाक्ष करते हुए दिया था। यह बेहद शर्मनाक है कि प्रधानमंत्री इस तरह की भाषा का इस्तेमाल खुले मंच से करते है एवं किसी महिला के वैधव्य का माखौल उड़ाना उनके स्त्री सम्मान के दृष्टिकोण को भी कठघरे में खड़ा करता है। यह कोई एक एवं अंतिम मौका नहीं है जब हमारे राज नेताओं के बिगड़े बोल हो, वर्तमान भारतीय राजनीति ने ऐसे कई मौके देखे हैं।

निष्कर्ष –

एक राजनेता द्वारा किसी दूसरे राजनेता पर की गयी टिप्पणी बेशक उन्हें चुनावों में फायदा दिलवाकर सत्ता सुख दिलवा दे। पर यकीनन यह समाज के लिए बहुत नुकसानदेह हैं। वर्तमान राज नेताओं के बिगड़े बोल कहीं न कहीं संविधान के नैतिक मूल्यों की धज्जियाँ उड़ाने वाला है। ये सभी नेता एक पब्लिक फिगर है, इनकी अपनी एक फैन-फाॅलोइंग है, अपना कल्ट है, जब इनके समर्थक इन्हीं बयानों को किसी गली-मुहल्ले, चौक-चौराहे, घर-परिवार में सुनते होगें। तो वे किस तरह इनका अनुसरण करते होगें एवं उसके क्या भयावह परिणाम हो सकते हैं। यह अपने-आप में ही एक विचारणीय परिस्थिति है।

वर्तमान राजनीति और नेताओं के बिगड़े बोल

21 वीं सदी की वर्तमान राजनीति में भारतीय राज नेताओं के बिगड़े बोल आवाम की आवाज को कमजोर करते हैं क्योकिं असल मुद्दों से ध्यान हटता है। यहाँ सवाल मोदी, सोनिया, कैलाश, या शरद् यादव का नहीं है, मुद्दा है कि सबकुछ आएगा-जाएगा बचेगा तो सिर्फ लोकतंत्र और संविधान। उसकी इतनी लानत-मलानत मत करवाइए, तंज रखिए पर तर्क के साथ, नेहरू और लोहिया के दौर में लौटिए और किस तरह की सभ्य बहसें संसद से लेकर सड़कों तक का हिस्सा हुआ करती थी। इस पर यदि शीघ्र ही विचार न किया गया तो हम अपनी नयी पीड़ी को यह विरासत सौंपते हुए बेहद शर्मिंन्दा रहेगें।

इस पर दोषारोपण के बजाय अब कुछ समाधान सोचिए वरना इस जिन्न का बोतल में जाना अब बहुत मुश्किल है जरूरी है कि वर्तमान राजनीति में इस तरह के नेताओं के बिगड़े बोल से बचें।

 

 

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21 वीं सदी की वर्तमान राजनीति में भारतीय राज नेताओं के बिगड़े बोल आवाम की आवाज को कमजोर करते हैं क्योकिं असल मुद्दों से ध्यान हटता है।
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